राष्ट्र निर्माण में अधिवक्ताओं की भूमिका हमेशा सर्वोपरि रही है- एडवोकेट मोहम्मद शरीफ

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शाहपुरा-मूलचन्द पेसवानी
राष्ट्र निर्माण में अधिवक्ता की भूमिका हमेशा सर्वोपरि रही हे स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन से लेकर वर्तमान सरकार तक वकीलों ने राष्ट्र निर्माण में अपना सत प्रतिशत दिया है इस देश को आजाद कराने में जिन स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी अग्रिम भूमिका निभाई उनमे में सबसे ज्यादा अधिवक्ता रहे हैं आम आदमी को न्याय दिलाने के बीच की योजक कड़ी का काम अधिवक्ता करता है अधिवक्ता नागरिकों के अधिकार की आवाज है। यह बात शनिवार को अधिवक्ता दिवस पर अभिभाषक संस्था शाहपुरा के अध्यक्ष मोहम्मद शरीफ ने रखी।
स्थानीय अभिभाषक संस्था मैं भारत रत्न प्राप्त डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के जन्म उत्सव पर अधिवक्ता दिवस के रुप में बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्थानीय अभिभाषक सस्था के अध्यक्ष मोहम्मद शरीफ ने की। कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता दीपक पारीक ने किया। सामूहिक रुप से सब ने वकील एकता जिंदाबाद, भारत माता की जय घोष के नारों के साथ मनाया।
प्रेस प्रवक्ता राहुल पारीक ने जानकारी देते हुए बताया कि समारोह में भीलवाड़ा जिला परिषद सदस्य व पूर्व अभिभाषक संस्था अध्यक्ष शिवराज कुमावत ने कहा कि स्वतंत्रता ही नहीं अपितु जब स्वतंत्रता मिली और नए भारत को गढ़ने का समय आया तब भी वकीलों की महत्ता बनी रही। महात्मा गांधी से लेकर बी आर अम्बेडकर तक लोग वकालत के पेशे से अपने जीवन की शुरुआत करने वाले रहे हैं। इन सब भारत की महान विभूतियों के प्रारंभिक पेशे वकालत ही रहे बाद में यह लोग भले राष्ट्रपति मंत्री हुए परन्तु प्रारंभ में वकील ही रहे। राजनीति के प्रदार्पण के पहले वकालत एक तरह की परंपरा रही है। अधिकांश राजनेताओं का प्रारंभिक पेशा वकालत है। मौजूदा मोदी सरकार में भी 18 केबिनेट मंत्री वकील है। लगभग इतने ही वकील भारत के प्रथम मंत्रिमंडल में भी रहें हैं।
इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिलोकचंद नौलखा, कन्हैया लाल धाकड़, दिनेश जी व्यास गोविंद सिंह जी हाडा, कमला प्रसाद पालीवाल, रामप्रसाद जाट, नमन ओझा, अविनाश जीनगर, योगेंद्र सिंह भाटी, सुनील कुमार शर्मा, अक्षयराज रेबारी, अंकित शर्मा, आशीष भारद्वाज, सोहेल खान, लालाराम गुर्जर, प्रीति जैन, अरविंद सिंह राणावत, दीपक मीणा आदि।