श्रीरामकथा देती त्याग व साधनामय जीवन जीने का संदेशः प्रेमभूषणजी महाराज

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सज्जनों की रक्षा के लिए असुरों का नाश करते है भगवान

श्रीरामकथा महोत्सव के तीसरे दिन चित्रकूटधाम में उमड़े भक्तगण

भीलवाड़ा, 22 सितम्बर। जीवन अर्थमय नहीं होकर धर्ममय, भोगमय नहीं होकर धर्ममय और असत्यमय नहीं होकर सत्यमय होना चाहिए। ये तीनों मनुष्य जीवन के लिए सर्वकालिक सामग्री है जिसका संग्रह करना है। जीवन को भोगमय नहीं बनाकर योगमय बनाना है। योग-साधना में में रहने वाला संग्रह करता है जबकि भोग में रहने वाला नाश करता है। श्रीरामकथा इसी का निरूपण करती है कि जीवन त्यागमय-साधनामय रहना चाहिए।ये विचार अयोध्या के ख्यातनाम कथावाचक परम पूज्य प्रेमभूषणजी महाराज ने बुधवार को श्रीसंकट मोचन हनुमान मंदिर भीलवाड़ा की ओर से श्री रामकथा सेवा समिति भीलवाड़ा के तत्वावधान में चित्रकूटधमा में आयोजित नौ दिवसीय श्री रामकथा महोत्सव के तीसरे दिन गुरूवार को कथावाचन करते हुए व्यक्त किए। व्यास पीठ की विधिवत पूजा के बाद उस पर विराजित होकर परम पूज्य प्रेमभूषणजी महाराज के मुखारबिंद से श्रीराम कथा वाचन शुरू हुआ तो पूरा पांडाल भक्ति के रस में डूब सा गया। कथा सुनने के लिए धर्मनगरी भीलवाड़ा के भक्तगण इस कदर उमड़ पड़े कि विशाल पांडाल भी छोटा पड़ता नजर आया। कथा में तीसरे दिन भगवान के जन्मोत्सव प्रसंग के साथ भोले बाबा शिवजी की साधना व गृहस्थ जीवन के प्रसंग की भी चर्चा हुई। ‘हम रामजी के रामजी हमारे है सेवा ट्रस्ट’ के बैनरतले कथावाचन करने वाले प्रेममूर्ति श्रीप्रेमभूषणजी महाराज ने कथावाचन करते हुए कहा कि श्रीरामचरितमानस त्याग एवं विराग की गाथा है एवं जिसके जीवन में ये है उसी के जीवन में रामराज्य उपस्थित होता है। भगवान की कथा अमृत रस वर्षा है जो कान तक नहीं बल्कि हद्य तक पहुंचती है। श्रीरामकथा मनोरंजन नहीं बल्कि मनरंजन है। जो कथा लोगों को गंगाजी के समान पवित्र करती है वह आपको सुना रहे है। उन्होंने कहा कि श्रीरामजी की कथा में 84 प्रसंग है और इनका श्रवण करने से जीवन का कल्याण होता है। प्रभु की तरह प्रभु की कथा भी अनंत है। भक्तों के प्रेम के कारण ही निर्गुण भगवान सगुण होते है। महाराजश्री ने कहा कि भगवान की सेवा जीव भाव से करनी चाहिए। भगवान के प्रति सेवा की भावना नहीं होने पर अपेक्षा पूरी नहीं होगी। भगवान तुम्हारी हर बात मानेंगे बस भक्ति कर्माबाई, शबरीबाई, नरसी भगत जैसी होनी चाहिए। भगवत प्रेम के अलावा भगवान से कोई अपेक्षा मत करों। उन्होंने कहा कि भगवान असुरो को अकारण नहीं मारते बल्कि सज्जनों की रक्षा के लिए उनका नाश करते है। अधर्म कभी किसी युग में धर्म से उपर नहीं जा सकता। भगवान पापियों के लिए नहीं बल्कि केवल सज्जन के लिए शरीर धारण करते है।

कथा सुनाने वाला नहीं सुनने वाला धन्य

प्रेममूर्ति प्रेमभूषणजी महाराज ने कहा कि साधना एक रस है साधक जब सहजावस्था में प्रवेश करता है तो कितनी देर बैठ जाएगा पता नहीं चलता। कई ऋषि-मुनि वर्षो साधना में लीन रहते है। उन्होंने कहा कि कथा सुनाने वाला नहीं सुनने वाला धन्य है। सुनने वाला जिस श्रद्धा से श्रवण करता है उसी श्रद्धा से सुनाने वाला रामरस का वर्णन करता है। जो भगवत भजन में आपका सहयोगी उसका सम्मान करना चाहिए। जो पुराणों में भगवान की कथा वर्णित है उसे सुनाना हमारा काम है। भगवान का शरीर जिस मन में रहता उसी मन में रहो। मनुष्य का जीवन अलौकिक थाती है इसका संरक्षण दिव्यतापूर्वक करना चाहिए।

भजनों की गंगा में डूबकी लगाते रहे भक्तगण

श्रीराम कथा शुरू होने से पहले एवं प्रेममूर्ति प्रेमभूषणजी महाराज द्वारा कथा शुरू करने के बाद भी निरन्तर भजनों की गंगा माहौल को भक्ति के रस से सराबोर करती रही। कथा में हम रामजी के रामजी हमारे है, बड़े भाग्य से मनुज तन मिला है, धन्य-धन्य गिरिराज कुमारी, जय-जय रामकथा जय श्रीरामकथा, जब-जब हुई धर्म को हानि तब-तब खत्म हुए अभिमानी आदि भजनों ने माहौल भक्तिपूर्ण कर दिया। इस दौरान कई श्रोता अपने स्थानों पर खड़े होकर नृत्य करते रहे और पांडाल में जय सियाराम, जय भोलेनाथ के जयकारे गूंजते रहे। भजनों के साथ रामचरितमानस की चौपाईयों का पाठ भी होता रहा।

जजमानों ने की व्यास पीठ के समक्ष आरती

श्रीराम कथा सेवा समिति के प्रवक्ता एवं मंच संचालक पंडित अशोक व्यास ने बताया कि मंच पर पंचमुखी दरबार के महन्त लक्ष्मणदासजी महाराज, कथा आयोजक संकटमोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबूगिरीजी महाराज, टेकरी के बालाजी मंदिर के महंत बनवारीशरण काठियाबाबा, हाथीभाटा आश्रम के महन्त संतदास सहित कई संत-महात्मा का सानिध्य में मिला। प्रेमभूषणजी महाराज के व्यास पीठ पर विराजित होने के बाद आरती कर आशीर्वाद पाने वालों में जजमानों में नंदकिशोर झंवर, अरूण अग्रवाल, रामेश्वरलाल काबरा, श्यामलाल डाड, रमेश बंसल, कृष्णगोपाल बंसल, जगदीश सोनी, गोपाल विजयवर्गीय, हेमंत गर्ग, पीडी आगीवाल, राजेश पलोड़, किशन मारू, प्रहलादराय सोनी नारायण लाहोटी, गोपाल जाट, ताराचंद पमनानी आदि शामिल थे। शाम को दूसरे दिन की कथा समाप्ति पर भी आरती की गई। हम रामजी के रामजी हमारे है सेवा ट्रस्ट के तारकेश्वर मिश्र ने ट्रस्ट की ओर से भक्तों का स्वागत किया। श्रीरामकथा समिति के अध्यक्ष गजानंद बजाज ने बताया कि सुशील कंदोई, मंजू पोखरना, कन्हैयालाल स्वर्णकार,पीयूष डाड, पवन नागौरी, गोपाल जागेटिया, मनोज गुप्ता, राधा कंदोई, सुधा बेसवाल, मोना डाड, पूजा बजाज, गुड्ी नागौरी ने श्रीराम जन्मोत्सव में बहुत अच्छी सेवाएं देकर समिति को सहयोग प्रदान किया। श्रीराम कथा का वाचन नगर परिषद के चित्रकूटधाम प्रांगण में 28 सितम्बर तक प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक होगा।