रेवा नदी के उद्गम स्थल, विशाल कुंड और प्राचीन धार्मिक मान्यताओं के कारण देशभर के श्रद्धालुओं की पहली पसंद बना उपरमाल का प्रसिद्ध शिवधाम
बिजोलिया। (नरेश धाकड़)
शिवभूमि उपरमाल क्षेत्र का प्राचीन कुकड़ेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक, ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक महत्व के कारण प्रदेश के प्रमुख आस्था केंद्रों में अपनी अलग पहचान रखता है। तालाब के पास स्थित यह मंदिर, खोडिया विशाल कुंड, प्राचीन मान्यताओं और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करता है। सावन माह में यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन एवं जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त सराय भी उपलब्ध है।

मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष कमलेश बावतिया ने बताया कि कुकड़ेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास कई शताब्दियों पुराना है। मंदिर में पिछले 70 से 80 वर्षों से अखंड ज्योत और अखंड धूणी निरंतर प्रज्वलित हैं, जो यहां की प्रमुख धार्मिक परंपरा का प्रतीक हैं। मंदिर के समीप स्थित विशाल कुंड को स्थानीय लोग औषधीय गुणों से युक्त मानते हैं। मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से त्वचा संबंधी रोगों में लाभ मिलता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मेवाड़ के तत्कालीन राजा हवन को कुष्ठ रोग हो गया था। उन्होंने इसी पवित्र कुंड में स्नान किया, जिससे उन्हें रोग से मुक्ति मिली। बाद में उन्होंने तिलस्वां महादेव में अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर विशेष पूजा-अर्चना करवाई। मान्यता यह भी है कि मंदिर के सामने से रेवा नदी का उद्गम स्थल है, जो प्राचीन काल में बारहों महीने प्रवाहित रहती थी।

मंदिर परिसर में गणेश मंदिर, मंगलपूर्ण माताजी मंदिर, शिव नंदी, पूर्वमुखी बाल रूप बालाजी मंदिर, अन्नपूर्णा माता मंदिर तथा काल भैरव मंदिर स्थित हैं। परिसर में महंत भोलेनाथ की समाधि भी बनी हुई है, जहां श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक दर्शन करते हैं।
हर वर्ष माघ अमावस्या और महाशिवरात्रि पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। वर्ष 2017 में मंदिर परिसर में 21 कुंडीय महायज्ञ का भव्य आयोजन हुआ था, जिसमें बड़ी संख्या में संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
मंदिर का विशाल एवं भव्य स्वरूप इसकी विशेष पहचान है। मंदिर में 16 स्तंभ और 17 तोरण द्वार इसकी प्राचीन स्थापत्य कला की सुंदर झलक प्रस्तुत करते हैं। यहां तक पहुंचने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-27 से बेरीसाल होते हुए तथा बिजोलिया–मालीपुरा मार्ग से सड़क सुविधा उपलब्ध है। निकट ही स्थित झरने भड़क महादेव और झरिया महादेव भी प्रमुख धार्मिक स्थल हैं, जहां श्रद्धालु आसानी से पहुंच सकते हैं।
वर्तमान में सावन माह के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। प्रतिदिन पंडित विजेश शर्मा के सान्निध्य में रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, शिव चालीसा एवं चमक पाठ का आयोजन किया जा रहा है। पूरे मंदिर परिसर में “हर-हर महादेव” के जयघोष से वातावरण शिवमय बना हुआ है और श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है।
