बिजोलिया प्रेस ट्रस्ट मामले में हाईकोर्ट का बड़ा हस्तक्षेपट्रस्ट के खिलाफ किसी भी कार्रवाई पर लगाई रोक, प्रशासन से 4 सप्ताह में मांगा जवाब

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बिजौलिया। कस्बे के चर्चित प्रेस ट्रस्ट भूमि प्रकरण में राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर ने महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए ट्रस्ट को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायालय ने तहसीलदार बिजोलिया द्वारा जारी नोटिस पर अंतरिम रोक लगाते हुए आदेश दिए हैं कि याचिकाकर्ता एवं प्रेस ट्रस्ट के खिलाफ उक्त नोटिस के आधार पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाए।

मामले में प्रेस ट्रस्ट बिजोलिया के अध्यक्ष श्याम विजयवर्गीय की ओर से अधिवक्ता भैरूलाल जाट, जितेंद्र सिंह गौड़ एवं कपिल विजयवर्गीय ने उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की। याचिका में बताया गया कि प्रेस ट्रस्ट बिजोलिया का आराजी नंबर 2013/243 (नया आराजी नंबर 2280/2013) पर पिछले करीब 22 वर्षों से कब्जा चला आ रहा है।

याचिका के अनुसार ट्रस्ट की ओर से उक्त भूमि के आवंटन के लिए मुख्यमंत्री एवं जिला कलेक्टर भीलवाड़ा को आवेदन प्रस्तुत किया गया था। इस पर उपखंड अधिकारी बिजोलिया तथा तहसीलदार बिजोलिया को जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए। स्थानीय प्रशासन द्वारा जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए भूमि आवंटन की अनुशंसा भी की गई। इसके बाद तहसीलदार ने भूमि आवंटन का प्रस्ताव तैयार कर उपखंड अधिकारी को भेज दिया, लेकिन आवंटन की प्रक्रिया अभी तक लंबित है।

इसी बीच, याचिका में आरोप लगाया गया कि राजनीतिक द्वेषता के चलते तहसीलदार बिजोलिया ने 5 मई को ट्रस्ट अध्यक्ष श्याम सुंदर विजयवर्गीय को व्यक्तिगत नोटिस जारी कर उक्त स्थान से पांच दिन के भीतर कब्जा हटाने के आदेश दिए। ट्रस्ट की ओर से नोटिस का जवाब प्रस्तुत किए जाने के बावजूद प्रशासनिक दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया गया।

याचिका में यह भी कहा गया कि एक ओर प्रशासन स्वयं भूमि आवंटन की अनुशंसा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कब्जा हटाने के नोटिस जारी कर रहा है, जो विरोधाभासी स्थिति को दर्शाता है। इससे आहत होकर ट्रस्ट की ओर से राजस्थान उच्च न्यायालय की शरण ली गई।

मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने तहसीलदार के नोटिस पर रोक लगाते हुए जिला कलेक्टर भीलवाड़ा, उपखंड अधिकारी बिजोलिया, तहसीलदार बिजोलिया एवं नगरपालिका बिजोलिया को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

अब इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई माह के तीसरे सप्ताह में निर्धारित की गई है।

गौरतलब है कि उक्त भूमि के नजदीक सहित नगर की अन्य सरकारी एवं बिलानाम जमीनों पर बड़ी संख्या में अतिक्रमण हैं, लेकिन प्रेस ट्रस्ट से जुड़े इस मामले में व्यक्ति विशेष को निशाना बनाते हुए कार्रवाई किए जाने की चर्चा कस्बे में बनी हुई है।

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