करोड़ों की सड़क स्वीकृत, लेकिन ऊपर माल की जर्जर सड़कें फिर छूटीं; ग्रामीणों में आक्रोश, जनप्रतिनि धियों और प्रशासन पर उठे सवाल
बिजोलिया। (नरेश धाकड़)
राज्य सरकार ने मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2026-27 के बजट के तहत 12.10 करोड़ रुपये की लागत से 10 सड़क निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों को स्वीकृति दी है। लेकिन सबसे अधिक राजस्व देने वाले बिजोलिया क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण और वर्षों से जर्जर सड़कें इस बजट से बाहर रहने पर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को खनिज, कृषि और अन्य संसाधनों से सबसे अधिक राजस्व देने वाले बिजोलिया क्षेत्र के साथ लगातार विकास के नाम पर सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। जिस क्षेत्र की बदौलत सरकारी खजाने में करोड़ों रुपये पहुंचते हैं, उसी क्षेत्र की जनता आज भी टूटी-फूटी और जानलेवा सड़कों पर सफर करने को मजबूर है।

बजट में जिन सड़कों को शामिल नहीं किया गया, उनमें लक्ष्मी निवास–जोलास मार्ग (5 किमी), चारभुजा चौराहा–डोबिया चौराहा मार्ग (7 किमी), मालीपुर चौराहा–छोटी बिजोलिया मार्ग (5 किमी), कामा–सदाराम जी का खेड़ा मार्ग (4 किमी) तथा सतकुड़िया चौराहा–तिलस्वां महादेव मार्ग (8 किमी) प्रमुख हैं। इन मार्गों पर प्रतिदिन हजारों ग्रामीण, किसान, विद्यार्थी, व्यापारी और श्रद्धालु आवागमन करते हैं, लेकिन वर्षों से इनकी हालत बद से बदतर बनी हुई है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि इन सड़कों की दुर्दशा को लेकर मीडिया लगातार प्रमुखता से समाचार प्रकाशित करता रहा है। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान भी इस ओर आकर्षित कराया गया, लेकिन आश्वासनों के अलावा धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब बजट में भी इन मार्गों को जगह नहीं मिलने से लोगों में निराशा और आक्रोश दोनों बढ़ गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में इन मार्गों पर चलना किसी जोखिम से कम नहीं है। जगह-जगह गहरे गड्ढे, उखड़ी सड़कें और जलभराव के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इसके बावजूद न जनप्रतिनिधियों ने इन मार्गों को प्राथमिकता दी और न ही संबंधित विभागों ने इनके प्रस्तावों को गंभीरता से आगे बढ़ाया।
लोगों का सवाल है कि जब विधानसभा क्षेत्र के अन्य हिस्सों की सड़कें करोड़ों रुपये के बजट में शामिल हो सकती हैं, तो बिजोलिया क्षेत्र की सबसे अधिक उपयोग में आने वाली सड़कें आखिर क्यों उपेक्षित रह गईं? क्या सबसे अधिक राजस्व देने वाले क्षेत्र की जनता केवल चुनावी वादों तक ही सीमित रह जाएगी?
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, सार्वजनिक निर्माण विभाग, जिला प्रशासन तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि इन सभी जर्जर सड़कों का तत्काल सर्वे करवाकर विशेष स्वीकृति जारी की जाए, ताकि वर्षों से विकास की बाट जोह रहे ऊपरी माल क्षेत्र को भी उसका अधिकार मिल सके।
जनता के तीखे सवाल
क्या सबसे अधिक राजस्व देने वाले बिजोलिया क्षेत्र के साथ विकास के नाम पर सौतेला व्यवहार हो रहा है?
क्या जनप्रतिनिधि केवल घोषणाओं तक सीमित रहेंगे या इन सड़कों के निर्माण के लिए भी ठोस पहल करेंगे?
आखिर कब खुलेगी प्रशासन और जिम्मेदार विभागों की आंखें, ताकि ग्रामीणों को सुरक्षित और बेहतर सड़कें मिल सकें?
